केरल में तेजी से फैल रहे Zika Virus का नहीं है कोई इलाज, जानें कारण, लक्षण और बचाव


Zika Virus outbreak in India: केरल में जीका वायरस के मामले तेजी से बढ़कर 21 हो गए हैं. जिस कारण केरल के साथ मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों में भी अलर्ट कर दिया गया है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कोरोना महामारी के बीच फैल रहे जीका वायरस का भी अभी तक कोई इलाज मौजूद नहीं है. जीका वायरस के संक्रमण को रोकने का तरीका सिर्फ बचाव और सही जानकारी रखना है. आइए जानते हैं कि भारत में फैल रहे जीका वायरस (Zika Virus Cases in India) के कारण, लक्षण और बचाव क्या हैं?

क्या है जीका वायरस और कैसे फैलता है? (What is Zika Virus and its transmission in hindi)
जीका वायरस एक मच्छर जनित संक्रमण है. यह संक्रमण एडीज प्रजाति के मच्छरों द्वारा फैलता है. एडीज प्रजाति में भी मुख्य रूप से Aedes albopictus और Aedes aegypti मच्छर जीका वायरस के फैलाव के लिए जिम्मेदार होते हैं. यह वायरस फ्लेविविरिडे परिवार के फ्लेवीवायरस जीन्स (Flavivirus genus of Flaviviridae Family) से ताल्लुक रखता है. इसी परिवार से डेंगू वायरस, चिकनगुनिया, येलो फीवर, वेस्ट नाइल वायरस आदि संक्रमण भी संबंध रखते हैं. जब कोई संक्रमण रहित एडीज मच्छर जीका वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति को काटता है, तो वह भी संक्रमित हो जाता है. इसके बाद वह जिस भी स्वस्थ व्यक्ति को काटेगा, उसे भी संक्रमित कर देगा. आमतौर पर, यह मच्छर दिन और शाम के समय ही काटता है.

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जीका वायरस के लक्षण और संकेत (Signs and Symptoms of Zika Virus)
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, जीका वायरस के संपर्क में आने 3 से 14 दिन के भीतर जीका वायरस की बीमारी (Zika Virus Disease) के लक्षण व संकेत दिखने लगते हैं. जो कि 2 दिन से लेकर 7 दिन तक दिख सकते हैं. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, जीका वायरस के अधिकतर मामलों में कोई लक्षण नहीं देखे जाते हैं. जीका वायरस के लक्षण (Zika Virus Symptoms) निम्नलिखित हैं. जैसे-

  • हल्का बुखार
  • रैशेज
  • आंख आना
  • मांसपेशी और जोड़ों में दर्द
  • सिरदर्द
  • बेचैनी होना, आदि

इन्हीं लक्षणों व संकेतों और ट्रेवल हिस्ट्री के आधार पर ही जीका वायरस के मामले की पुष्टि की जाती है. वहीं, बड़े बच्चों और वयस्कों को जीका वायरस संक्रमण होने पर गुलियन-बेरी सिंड्रोम (Guillain-Barre Syndrome), न्यूरोपैथी (Neuropathy) और मायलाइटिस (Myelitis) जैसी तंत्रिका संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं.

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विश्व और भारत में जीका वायरस का इतिहास (History of Zika Virus in India and World)
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, जीका वायरस का सबसे पहला मामला 1947 में युगांडा के बंदरों के अंदर देखा गया और युगांडा में ही 1952 में इंसानों के अंदर पहला मामला दर्ज किया गया. इसके बाद 1960 से लेकर 1980 तक यह दुनिया के दूसरे देशों में भी पहुंचा. जीका वायरस का पहला प्रकोप 2007 में Island of Yap में दर्ज किया गया.

माना जाता है कि एशिया के अंदर जीका वायरस 1970 के दशक में प्रवेश कर चुका था. जिससे कारण पाकिस्तान और इंडोनेशिया में इसके कुछ मामले दर्ज किए गए. लेकिन भारत में जीका वायरस का पहला आधिकारिक मामला 2017 में गुजरात में देखा गया, जिसके बाद यह तमिलनाडु भी पहुंचा. वहीं, 2018 में मध्यप्रदेश और राजस्थान में भी इसका बड़ा प्रकोप देखा गया.

यौन संबंध के द्वारा भी फैल सकता है जीका वायरस (ZIKV)
डब्ल्यूएचओ कहता है कि जीका वायरस यौन संबंध के द्वारा भी फैल सकता है. जिसके कारण जीका वायरस इंफेक्शन का गर्भवती महिलाओं और भ्रूण तक पहुंचने का भी खतरा बन सकता है. इसलिए, विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि जीका वायरस से प्रभावित क्षेत्रों में यौन संबंध के दौरान कॉन्डम का इस्तेमाल करना चाहिए. वहीं, अगर कोई महिला असुरक्षित यौन संबंध के बाद जीका वायरस के खतरे के कारण गर्भवती होने से बचना चाहती है, तो उसे जल्द से जल्द गर्भनिरोध के तरीके अपनाने चाहिए.

जीका वायरस के कारण हो सकती हैं जन्मजात विकार
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, जीका वायरस गर्भवती महिला से भ्रूण तक पहुंच सकता है. जिसके कारण जन्म के समय शिशु का सिर छोटा होना (microcephaly) व अन्य जन्मजात विकार हो सकते हैं, जिन्हें कॉन्जेनिटल जीका सिंड्रोम (Congenital Zika Syndrome) कहा जाता है. इन जन्मजात विकारों के कारण शिशु को जोड़ों की संरचना में समस्या, आंखों में दिक्कत व सुनने में परेशानी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

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जीका वायरस का इलाज क्या है? (What is the treatment of Zika Virus)
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, अभी तक जीका वायरस का कोई आधिकारिक इलाज नहीं मिल पाया है. आमतौर पर जीका वायरस के लक्षण हल्के होते हैं और इनके जानलेवा बनने का खतरा काफी कम होता है. हालांकि, द प्रिंट की खबर के मुताबिक, द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज ने फिलहाल 6 विभिन्न विकासशील वैक्सीन को सूचीबद्ध किया है. जो कि अलग-अलग तकनीक से तैयार की जा रही हैं और ट्रायल में मौजूद हैं.

जीका वायरस से बचाव (Prevention of Zika Virus)
जीका वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बचाव ही एकमात्र तरीका है. जिसके लिए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए. जैसे-

  1. खासतौर से, दिन और शाम के समय पूरी बाजू और पैरों को ढकते हुए कपड़े पहनें.
  2. घरों में मच्छर रिपेलेंट का इस्तेमाल करें.
  3. अपने घर और घर के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें.
  4. किसी भी खाली बर्तन या जगह पर बारिश का पानी इकट्ठा ना होने दें.
  5. अपने कूलर, पानी की टंकी, पौधों आदि को समय-समय पर साफ करें.
  6. गर्भवती महिलाएं और बच्चों का विशेष रूप से ध्यान रखें.
  7. जीका वायरस से प्रभावित किसी जगह पर जा रहे हैं, तो अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखें.
  8. यौन संबंध बनाते हुए कॉन्डम का इस्तेमाल करें.

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.





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